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पञ्च-प्रेतासनासीना पञ्चब्रह्म-स्वरूपिणी । चिन्मयी परमानन्दा विज्ञान-घनरूपिणी ॥ ६१॥

She is seated upon a throne of five (lifeless) deities, representing their dependence on her power. She is the essence of the fivefold Brahman. She is pure consciousness, supreme bliss, and the solid mass of divine knowledge.

english translation

वह पाँच (निर्जीव) देवताओं के सिंहासन पर विराजमान हैं, जो उनकी शक्ति पर उनकी निर्भरता का प्रतीक हैं। वह पंचगुण ब्रह्म का सार हैं। वह शुद्ध चेतना, परम आनंद और दिव्य ज्ञान का ठोस पिंड हैं।

hindi translation

paJca-pretAsanAsInA paJcabrahma-svarUpiNI | cinmayI paramAnandA vijJAna-ghanarUpiNI || 61||

hk transliteration by Sanscript

ध्यान-ध्यातृ-ध्येयरूपा धर्माधर्म-विवर्जिता । विश्वरूपा जागरिणी स्वपन्ती तैजसात्मिका ॥ ६२॥

She is the form of meditation, meditator, and the meditated object; she transcends both righteousness and unrighteousness. She has the form of the entire universe, is present in the waking and dreaming states, and is the essence of the dream consciousness (Taijasa).

english translation

वह ध्यान, ध्याता और ध्यायी वस्तु का स्वरूप है; वह धर्म और अधर्म दोनों से परे है। वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का रूप है, जाग्रत और स्वप्न अवस्था में विद्यमान है, और स्वप्न चेतना (तैजस) का सार है।

hindi translation

dhyAna-dhyAtR-dhyeyarUpA dharmAdharma-vivarjitA | vizvarUpA jAgariNI svapantI taijasAtmikA || 62||

hk transliteration by Sanscript

सुप्ता प्राज्ञात्मिका तुर्या सर्वावस्था-विवर्जिता । सृष्टिकर्त्री ब्रह्मरूपा गोप्त्री गोविन्दरूपिणी ॥ ६३॥

She is the Self in deep sleep, the transcendent fourth state, and beyond all states of consciousness. She is the creator of the universe, the embodiment of Brahmā, and the sustainer in the form of Govinda (Vishnu).

english translation

वह गहन निद्रा में स्थित आत्मा हैं, पारलौकिक चतुर्थ अवस्था हैं, तथा चेतना की सभी अवस्थाओं से परे हैं। वह ब्रह्मांड की रचयिता, ब्रह्मा का अवतार और गोविंद (विष्णु) के रूप में पालनकर्ता हैं।

hindi translation

suptA prAjJAtmikA turyA sarvAvasthA-vivarjitA | sRSTikartrI brahmarUpA goptrI govindarUpiNI || 63||

hk transliteration by Sanscript

संहारिणी रुद्ररूपा तिरोधान-करीश्वरी । सदाशिवाऽनुग्रहदा पञ्चकृत्य-परायणा ॥ ६४॥

She is the dissolver (of the universe), taking the form of Rudra. She is the Supreme Goddess who causes the concealment (of truth). She grants divine grace in the form of Sadāśiva and is devoted to performing the five cosmic acts.

english translation

वे रुद्र रूप धारण करके (ब्रह्मांड का) संहार करने वाली हैं। वे परम देवी हैं जो (सत्य का) आच्छादन करती हैं। वे सदाशिव रूप में दिव्य कृपा प्रदान करती हैं और पंचकर्मों में समर्पित हैं।

hindi translation

saMhAriNI rudrarUpA tirodhAna-karIzvarI | sadAzivA'nugrahadA paJcakRtya-parAyaNA || 64||

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भानुमण्डल-मध्यस्था भैरवी भगमालिनी । पद्मासना भगवती पद्मनाभ-सहोदरी ॥ ६५॥

She resides at the center of the solar disc, is the fierce goddess Bhairavī, and is adorned with the divine powers (Bhagamālinī). She is seated on a lotus, the Divine Mother, and the sister of Padmanābha (Viṣṇu).

english translation

वह सूर्य चक्र के केंद्र में निवास करती हैं, उग्र देवी भैरवी हैं, और दिव्य शक्तियों (भगमलिनी) से सुशोभित हैं। वह कमल पर विराजमान हैं, दिव्य माँ हैं, और पद्मनाभ (विष्णु) की बहन हैं।

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bhAnumaNDala-madhyasthA bhairavI bhagamAlinI | padmAsanA bhagavatI padmanAbha-sahodarI || 65||

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