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पञ्च-प्रेतासनासीना पञ्चब्रह्म-स्वरूपिणी । चिन्मयी परमानन्दा विज्ञान-घनरूपिणी ॥ ६१॥

She is seated upon a throne of five (lifeless) deities, representing their dependence on her power. She is the essence of the fivefold Brahman. She is pure consciousness, supreme bliss, and the solid mass of divine knowledge.

english translation

वह पाँच (निर्जीव) देवताओं के सिंहासन पर विराजमान हैं, जो उनकी शक्ति पर उनकी निर्भरता का प्रतीक हैं। वह पंचगुण ब्रह्म का सार हैं। वह शुद्ध चेतना, परम आनंद और दिव्य ज्ञान का ठोस पिंड हैं।

hindi translation

paJca-pretAsanAsInA paJcabrahma-svarUpiNI | cinmayI paramAnandA vijJAna-ghanarUpiNI || 61||

hk transliteration by Sanscript