1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
•
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
32.
द्वात्रिंशोऽध्यायः
Chapter 32
33.
त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 33
34.
चतुस्त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 34
35.
पञ्चत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 35
36.
षट्त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 36
37.
सप्तत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 37
38.
अष्टात्रिंशोऽध्यायः
Chapter 38
39.
एकोनचत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 39
40.
चत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 40
41.
एकचत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 41
42.
द्विचत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 42
43.
त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 43
44.
चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 44
45.
पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 45
46.
षट्चत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 46
47.
सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 47
48.
अष्टचत्वारिंशोऽध्यायः
Chapter 48
49.
एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 49
50.
पञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 50
51.
एकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 51
52.
द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 52
53.
त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 53
54.
चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 54
55.
पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 55
56.
षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 56
57.
सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 57
58.
अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः
Chapter 58
59.
एकोनषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 59
60.
षष्टितमोऽध्यायः
Chapter 60
61.
एकषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 61
62.
द्विषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 62
63.
त्रिषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 63
64.
चतुःषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 64
65.
पञ्चषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 65
66.
षट्षष्टितमोऽध्यायः
Chapter 66
67.
सप्तषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 67
68.
अष्टषष्टितमोऽध्यायः
Chapter 68
69.
एकोनसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 69
70.
सप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 70
71.
एकसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 71
72.
द्विसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 72
73.
त्रिसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 73
74.
चतुःसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 74
75.
पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 75
76.
षट्सप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 76
77.
सप्तसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 77
78.
अष्टसप्ततितमोऽध्यायः
Chapter 78
79.
एकोनाशीतितमोऽध्यायः
Chapter 79
80.
अशीतितमोऽध्यायः
Chapter 80
81.
एकाशीतितमोऽध्यायः
Chapter 81
82.
द्व्यशीतितमोऽध्यायः
Chapter 82
83.
त्र्यशीतितमोऽध्यायः
Chapter 83
84.
चतुरशीतितमोऽध्यायः
Chapter 84
85.
पञ्चाशीतितमोऽध्यायः
Chapter 85
86.
षडशीतितमोऽध्यायः
Chapter 86
87.
सप्ताशीतितमोऽध्यायः
Chapter 87
88.
अष्टाशीतितमोऽध्यायः
Chapter 88
89.
एकोननवतितमोऽध्यायः
Chapter 89
90.
नवतितमोऽध्यायः
Chapter 90
Progress:22.6%
प्रावृट् श्रियं च तां वीक्ष्य सर्वकालसुखावहाम् । भगवान् पूजयाञ्चक्रे आत्मशक्त्युपबृंहिताम् ।। १०-२०-३१ ।।
sanskrit
Thus observing the beauty and opulence of Vṛndāvana’s rainy season, a perennial source of great happiness, the Lord offered all respect to that season, which was expanded from His own internal potency. ।। 10-20-31 ।।
english translation
इस तरह परम आनन्द के शाश्वत स्रोत वृन्दावन की वर्षा ऋतु के सौन्दर्य और ऐश्वर्य का निरीक्षण करते हुए भगवान् ने उस ऋतु को नमस्कार किया जो उन्हीं की अन्तरंगा शक्ति का विस्तार थी। ।। १०-२०-३१ ।।
hindi translation
prAvRT zriyaM ca tAM vIkSya sarvakAlasukhAvahAm | bhagavAn pUjayAJcakre AtmazaktyupabRMhitAm || 10-20-31 ||
hk transliteration by Sanscriptएवं निवसतोस्तस्मिन् रामकेशवयोर्व्रजे । शरत्समभवद्व्यभ्रा स्वच्छाम्ब्वपरुषानिला ।। १०-२०-३२ ।।
sanskrit
While Lord Rāma and Lord Keśava were thus dwelling in Vṛndāvana, the fall season arrived, when the sky is cloudless, the water clear and the wind gentle. ।। 10-20-32 ।।
english translation
इस तरह जब भगवान् राम तथा भगवान् केशव वृन्दावन में रह रहे थे तो शरद ऋतु आ गई जिसमें आकाश बादलों से रहित, जल स्वच्छ तथा वायु मन्द हो जाती है। ।। १०-२०-३२ ।।
hindi translation
evaM nivasatostasmin rAmakezavayorvraje | zaratsamabhavadvyabhrA svacchAmbvaparuSAnilA || 10-20-32 ||
hk transliteration by Sanscriptशरदा नीरजोत्पत्त्या नीराणि प्रकृतिं ययुः । भ्रष्टानामिव चेतांसि पुनर्योगनिषेवया ।। १०-२०-३३ ।।
sanskrit
The autumn season, which regenerated the lotus flowers, also restored the various bodies of water to their original purity, just as the process of devotional service purifies the minds of the fallen yogīs when they return to it. ।। 10-20-33 ।।
english translation
कमलपुष्पों को पुन: उत्पन्न करनेवाली शरद ऋतु ने विविध जलाशयों को पूर्ववत् स्वच्छ (निर्मल) बना दिया जिस तरह कि भक्तियोग पतित योगियों के मनों को पुन: इस ओर लौटने पर शुद्ध बनाता है। ।। १०-२०-३३ ।।
hindi translation
zaradA nIrajotpattyA nIrANi prakRtiM yayuH | bhraSTAnAmiva cetAMsi punaryoganiSevayA || 10-20-33 ||
hk transliteration by Sanscriptव्योम्नोऽब्दं भूतशाबल्यं भुवः पङ्कमपां मलम् । शरज्जहाराश्रमिणां कृष्णे भक्तिर्यथाशुभम् ।। १०-२०-३४ ।।
sanskrit
Autumn cleared the sky of clouds, let the animals get out of their crowded living conditions, cleaned the earth of its covering of mud, and purified the water of contamination, in the same way that loving service rendered to Lord Kṛṣṇa frees the members of the four spiritual orders from their respective troubles. ।। 10-20-34 ।।
english translation
शरद ऋतु ने आकाश से बादलों को हटा दिया, पशुओं को भीड़भाड़ भरी जगहों से निकाल लिया, पृथ्वी के कीचड़ को साफ कर दिया तथा जल के गँदलेपन को दूर कर दिया जिस तरह कि भगवान् कृष्ण की प्रेमाभक्ति चारों आश्रमों के सदस्यों को उनकी अपनी अपनी व्याधियों से मुक्त कर देती है। ।। १०-२०-३४ ।।
hindi translation
vyomno'bdaM bhUtazAbalyaM bhuvaH paGkamapAM malam | zarajjahArAzramiNAM kRSNe bhaktiryathAzubham || 10-20-34 ||
hk transliteration by Sanscriptसर्वस्वं जलदा हित्वा विरेजुः शुभ्रवर्चसः । यथा त्यक्तैषणाः शान्ता मुनयो मुक्तकिल्बिषाः ।। १०-२०-३५ ।।
sanskrit
The clouds, having given up all they possessed, shone forth with purified effulgence, just like peaceful sages who have given up all material desires and are thus free of all sinful propensities. ।। 10-20-35 ।।
english translation
बादल अपना सर्वस्व त्यागकर शुद्ध तेज से उसी तरह चमकने लगे जिस तरह शान्त मुनिगण अपनी समस्त भौतिक इच्छाएँ त्यागने पर पापपूर्ण लालसाओं से मुक्त हो जाते हैं। ।। १०-२०-३५ ।।
hindi translation
sarvasvaM jaladA hitvA virejuH zubhravarcasaH | yathA tyaktaiSaNAH zAntA munayo muktakilbiSAH || 10-20-35 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:22.6%
प्रावृट् श्रियं च तां वीक्ष्य सर्वकालसुखावहाम् । भगवान् पूजयाञ्चक्रे आत्मशक्त्युपबृंहिताम् ।। १०-२०-३१ ।।
sanskrit
Thus observing the beauty and opulence of Vṛndāvana’s rainy season, a perennial source of great happiness, the Lord offered all respect to that season, which was expanded from His own internal potency. ।। 10-20-31 ।।
english translation
इस तरह परम आनन्द के शाश्वत स्रोत वृन्दावन की वर्षा ऋतु के सौन्दर्य और ऐश्वर्य का निरीक्षण करते हुए भगवान् ने उस ऋतु को नमस्कार किया जो उन्हीं की अन्तरंगा शक्ति का विस्तार थी। ।। १०-२०-३१ ।।
hindi translation
prAvRT zriyaM ca tAM vIkSya sarvakAlasukhAvahAm | bhagavAn pUjayAJcakre AtmazaktyupabRMhitAm || 10-20-31 ||
hk transliteration by Sanscriptएवं निवसतोस्तस्मिन् रामकेशवयोर्व्रजे । शरत्समभवद्व्यभ्रा स्वच्छाम्ब्वपरुषानिला ।। १०-२०-३२ ।।
sanskrit
While Lord Rāma and Lord Keśava were thus dwelling in Vṛndāvana, the fall season arrived, when the sky is cloudless, the water clear and the wind gentle. ।। 10-20-32 ।।
english translation
इस तरह जब भगवान् राम तथा भगवान् केशव वृन्दावन में रह रहे थे तो शरद ऋतु आ गई जिसमें आकाश बादलों से रहित, जल स्वच्छ तथा वायु मन्द हो जाती है। ।। १०-२०-३२ ।।
hindi translation
evaM nivasatostasmin rAmakezavayorvraje | zaratsamabhavadvyabhrA svacchAmbvaparuSAnilA || 10-20-32 ||
hk transliteration by Sanscriptशरदा नीरजोत्पत्त्या नीराणि प्रकृतिं ययुः । भ्रष्टानामिव चेतांसि पुनर्योगनिषेवया ।। १०-२०-३३ ।।
sanskrit
The autumn season, which regenerated the lotus flowers, also restored the various bodies of water to their original purity, just as the process of devotional service purifies the minds of the fallen yogīs when they return to it. ।। 10-20-33 ।।
english translation
कमलपुष्पों को पुन: उत्पन्न करनेवाली शरद ऋतु ने विविध जलाशयों को पूर्ववत् स्वच्छ (निर्मल) बना दिया जिस तरह कि भक्तियोग पतित योगियों के मनों को पुन: इस ओर लौटने पर शुद्ध बनाता है। ।। १०-२०-३३ ।।
hindi translation
zaradA nIrajotpattyA nIrANi prakRtiM yayuH | bhraSTAnAmiva cetAMsi punaryoganiSevayA || 10-20-33 ||
hk transliteration by Sanscriptव्योम्नोऽब्दं भूतशाबल्यं भुवः पङ्कमपां मलम् । शरज्जहाराश्रमिणां कृष्णे भक्तिर्यथाशुभम् ।। १०-२०-३४ ।।
sanskrit
Autumn cleared the sky of clouds, let the animals get out of their crowded living conditions, cleaned the earth of its covering of mud, and purified the water of contamination, in the same way that loving service rendered to Lord Kṛṣṇa frees the members of the four spiritual orders from their respective troubles. ।। 10-20-34 ।।
english translation
शरद ऋतु ने आकाश से बादलों को हटा दिया, पशुओं को भीड़भाड़ भरी जगहों से निकाल लिया, पृथ्वी के कीचड़ को साफ कर दिया तथा जल के गँदलेपन को दूर कर दिया जिस तरह कि भगवान् कृष्ण की प्रेमाभक्ति चारों आश्रमों के सदस्यों को उनकी अपनी अपनी व्याधियों से मुक्त कर देती है। ।। १०-२०-३४ ।।
hindi translation
vyomno'bdaM bhUtazAbalyaM bhuvaH paGkamapAM malam | zarajjahArAzramiNAM kRSNe bhaktiryathAzubham || 10-20-34 ||
hk transliteration by Sanscriptसर्वस्वं जलदा हित्वा विरेजुः शुभ्रवर्चसः । यथा त्यक्तैषणाः शान्ता मुनयो मुक्तकिल्बिषाः ।। १०-२०-३५ ।।
sanskrit
The clouds, having given up all they possessed, shone forth with purified effulgence, just like peaceful sages who have given up all material desires and are thus free of all sinful propensities. ।। 10-20-35 ।।
english translation
बादल अपना सर्वस्व त्यागकर शुद्ध तेज से उसी तरह चमकने लगे जिस तरह शान्त मुनिगण अपनी समस्त भौतिक इच्छाएँ त्यागने पर पापपूर्ण लालसाओं से मुक्त हो जाते हैं। ।। १०-२०-३५ ।।
hindi translation
sarvasvaM jaladA hitvA virejuH zubhravarcasaH | yathA tyaktaiSaNAH zAntA munayo muktakilbiSAH || 10-20-35 ||
hk transliteration by Sanscript