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महिष्य ऊचुः कुररि विलपसि त्वं वीतनिद्रा न शेषे स्वपिति जगति रात्र्यामीश्वरो गुप्तबोधः । वयमिव सखि कच्चिद्गाढनिर्भिन्नचेता नलिननयनहासोदारलीलेक्षितेन ।। १०-९०-१५ ।।

The queens said: O kurarī bird, you are lamenting. Now it is night, and somewhere in this world the Supreme Lord is asleep in a hidden place. But you are wide awake, O friend, unable to fall asleep. Is it that, like us, you have had your heart pierced to the core by the lotus-eyed Lord’s munificent, playful smiling glances? ।। 10-90-15 ।।

english translation

रानियों ने कहा: हे कुररी पक्षी, तुम विलाप कर रहे हो। अब रात हो गई है और परमेश्वर इस संसार में कहीं गुप्त स्थान पर सो रहे हैं। परन्तु हे मित्र, तुम जाग रहे हो, सो नहीं पा रहे हो। क्या ऐसा है कि, हमारी तरह, कमल-नेत्र भगवान की उदार, चंचल मुस्कुराती निगाहों से आपका दिल भी अंदर तक छलनी हो गया है? ।। १०-९०-१५ ।।

hindi translation

mahiSya UcuH kurari vilapasi tvaM vItanidrA na zeSe svapiti jagati rAtryAmIzvaro guptabodhaH | vayamiva sakhi kaccidgADhanirbhinnacetA nalinanayanahAsodAralIlekSitena || 10-90-15 ||

hk transliteration by Sanscript