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तां देवमायामिव वीरमोहिनीं सुमध्यमां कुण्डलमण्डिताननाम् । श्यामां नितम्बार्पितरत्नमेखलां व्यञ्जत्स्तनीं कुन्तलशङ्कितेक्षणाम् ।। १०-५३-५१ ।।

Rukmiṇī appeared as enchanting as the Lord’s illusory potency, who enchants even the sober and grave. Thus the kings gazed upon her virgin beauty, her shapely waist, and her lovely face adorned with earrings. Her hips were graced with a jewel-studded belt, her breasts were just budding, and her eyes seemed apprehensive of her encroaching locks of hair. ।। 10-53-51 ।।

english translation

रुक्मिणी भगवान की मायावी शक्ति के समान मोहक प्रतीत होती थीं, जो शांत और गंभीर लोगों को भी मंत्रमुग्ध कर देती हैं। इस प्रकार राजाओं ने उसकी कुंवारी सुंदरता, उसकी सुडौल कमर और कानों की बालियों से सजा हुआ उसका सुंदर चेहरा देखा। उसके कूल्हे एक रत्नजड़ित बेल्ट से सुशोभित थे, उसके स्तन उभरे हुए थे, और उसकी आँखें उसके बालों के अतिक्रमण से आशंकित लग रही थीं। ।। १०-५३-५१ ।।

hindi translation

tAM devamAyAmiva vIramohinIM sumadhyamAM kuNDalamaNDitAnanAm | zyAmAM nitambArpitaratnamekhalAM vyaJjatstanIM kuntalazaGkitekSaNAm || 10-53-51 ||

hk transliteration by Sanscript