Progress:34.8%

अनुचरैः समनुवर्णितवीर्य आदिपूरुष इवाचलभूतिः । वनचरो गिरितटेषु चरन्तीर्वेणुनाऽऽह्वयति गाः स यदा हि ।। १०-३५-८ ।।

Kṛṣṇa moves about the forest in the company of His friends, who vividly chant the glories of His magnificent deeds. He thus appears just like the Supreme Personality of Godhead exhibiting His inexhaustible opulences. When the cows wander onto the mountainsides and Kṛṣṇa calls out to them with the sound of His flute, ।। 10-35-8 ।।

english translation

कृष्ण अपने सखाओं के साथ जंगल में घूमते फिरते हैं। ये सखा उनके शानदार कार्यों का जोरशोर से यशगान करते हैं। इस तरह वे पूर्ण पुरुषोत्तम परमेश्वर की तरह अपने अक्षय ऐश्वर्य का प्रदर्शन करते प्रतीत होते हैं। जब गाएँ पर्वत की तलहटी में घूमती हैं और कृष्ण अपनी वंशी की तान से उन्हें बुलाते हैं, ।। १०-३५-८ ।।

hindi translation

anucaraiH samanuvarNitavIrya AdipUruSa ivAcalabhUtiH | vanacaro giritaTeSu carantIrveNunA''hvayati gAH sa yadA hi || 10-35-8 ||

hk transliteration by Sanscript