तं तार्क्ष्यपुत्रः स निरस्य मन्युमान् प्रचण्डवेगो मधुसूदनासनः । पक्षेण सव्येन हिरण्यरोचिषा जघान कद्रूसुतमुग्रविक्रमः ॥ १०-१७-७ ॥
The angry son of Tārkṣya moved with overwhelming speed in repelling Kāliya’s attack. That terribly powerful carrier of Lord Madhusūdana struck the son of Kadru with his left wing, which shone like gold. ॥ 10-17-7 ॥
english translation
तार्क्ष्य का क्रुद्ध पुत्र कालिय के वार को पीछे धकेलने के लिए प्रचंड वेग से आगे बढ़ा। उस अत्यन्त शक्तिशाली भगवान् मधुसूदन के वाहन ने कद्रु के पुत्र पर अपने स्वर्ण जैसे चमकीले बाएँ पंख से प्रहार किया। ॥ १०-१७-७ ॥
hindi translation