1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
•
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽद्ध्ययाः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
Progress:20.6%
एक एवेश्वरस्तस्मिन् सुरकार्ये सुरेश्वरः । विहर्तुकामस्तानाह समुद्रोन्मथनादिभिः ।। ८-६-१७ ।।
sanskrit
Although the Supreme Personality of Godhead, the master of the demigods, was capable of performing the activities of the demigods by Himself, He wanted to enjoy pastimes in churning the ocean. Therefore He spoke as follows. ।। 8-6-17 ।।
english translation
यद्यपि देवताओं के स्वामी भगवान् देवताओं के कार्यकलापों को स्वयं सम्पन्न करने में समर्थ थे फिर भी उन्होंने समुद्र-मन्थन की लीला का आनन्द उठाना चाहा। अतएव वे इस प्रकार बोले। ।। ८-६-१७ ।।
hindi translation
eka evezvarastasmin surakArye surezvaraH | vihartukAmastAnAha samudronmathanAdibhiH || 8-6-17 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:20.6%
एक एवेश्वरस्तस्मिन् सुरकार्ये सुरेश्वरः । विहर्तुकामस्तानाह समुद्रोन्मथनादिभिः ।। ८-६-१७ ।।
sanskrit
Although the Supreme Personality of Godhead, the master of the demigods, was capable of performing the activities of the demigods by Himself, He wanted to enjoy pastimes in churning the ocean. Therefore He spoke as follows. ।। 8-6-17 ।।
english translation
यद्यपि देवताओं के स्वामी भगवान् देवताओं के कार्यकलापों को स्वयं सम्पन्न करने में समर्थ थे फिर भी उन्होंने समुद्र-मन्थन की लीला का आनन्द उठाना चाहा। अतएव वे इस प्रकार बोले। ।। ८-६-१७ ।।
hindi translation
eka evezvarastasmin surakArye surezvaraH | vihartukAmastAnAha samudronmathanAdibhiH || 8-6-17 ||
hk transliteration by Sanscript