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महत्यां तीर्थयात्रायां तत्रागन् भारतीः प्रजाः । वृष्णयश्च तथाक्रूरवसुदेवाहुकादयः ।। १०-८२-५ ।।

O descendant of Bharata, among those arriving at the holy place were many Vṛṣṇis, such as Gada, Pradyumna and Sāmba, hoping to be relieved of their sins; Akrūra, Vasudeva, Āhuka and other kings also went there. ।। 10-82-5 ।।

english translation

हे भरत के वंशज, पवित्र स्थान पर पहुंचने वालों में गदा, प्रद्युम्न और सांबा जैसे कई वृष्णि थे, जो अपने पापों से छुटकारा पाने की उम्मीद कर रहे थे; अक्रूर, वासुदेव, आहुक तथा अन्य राजा भी वहाँ गये। ।। १०-८२-५ ।।

hindi translation

mahatyAM tIrthayAtrAyAM tatrAgan bhAratIH prajAH | vRSNayazca tathAkrUravasudevAhukAdayaH || 10-82-5 ||

hk transliteration by Sanscript