श्रिया पुष्ट्या गिरा कान्त्या कीर्त्या तुष्ट्येलयोर्जया । विद्ययाविद्यया शक्त्या मायया च निषेवितम् ॥ १०-३९-५५ ॥
Also in attendance were the Lord’s principal internal potencies — Śrī, Puṣṭi, Gīr, Kānti, Kīrti, Tuṣṭi, Ilā and Ūrjā — as were His material potencies Vidyā, Avidyā and Māyā, and His internal pleasure potency, Śakti. ॥ 10-39-55 ॥
english translation
यही नहीं, भगवान् की सेवा में उनकी मुख्य अन्तरंगा शक्तियों—श्री, पुष्टि, गीर, कान्ति, कीर्ति, तुष्टि, इला तथा ऊर्जा—के साथ साथ भौतिक शक्तियाँ विद्या, अविद्या, माया तथा उनकी अंतरंगा ह्लादिनी शक्ति जुटी हुई थीं। ॥ १०-३९-५५ ॥
hindi translation