विविक्त उपसङ्गम्य व्रीडीतः कृतहेलनः । पस्पर्श पादयोरेनं किरीटेनार्कवर्चसा ॥ १०-२७-२ ॥
Indra was very ashamed of having offended the Lord. Approaching Him in a solitary place, Indra fell down and lay his helmet, whose effulgence was as brilliant as the sun, upon the Lord’s lotus feet. ॥ 10-27-2 ॥
english translation
भगवान् का अपमान करने के कारण इन्द्र अत्यन्त लज्जित था। एकान्त स्थान में उनके पास जाकर इन्द्र उनके चरणों पर गिर पड़ा और सूर्य के समान तेज वाले मुकुट को भगवान् के चरणकमलों पर रख दिया। ॥ १०-२७-२ ॥
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