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धन्याः स्म मूढगतयोऽपि हरिण्य एता या नन्दनन्दनमुपात्तविचित्रवेषम् । आकर्ण्य वेणुरणितं सहकृष्णसाराः पूजां दधुर्विरचितां प्रणयावलोकैः ।। १०-२१-११ ।।

Blessed are all these foolish deer because they have approached Mahārāja Nanda’s son, who is gorgeously dressed and is playing on His flute. Indeed, both the doe and the bucks worship the Lord with looks of love and affection. ।। 10-21-11 ।।

english translation

ये मूर्ख हिरनियाँ धन्य हैं क्योंकि ये नन्द महाराज के पुत्र के निकट पहुँच गई हैं, जो खूब सजेधजे हुए हैं और अपनी बाँसुरी बजा रहे हैं। सचमुच ही हिरनी तथा हिरन दोनों ही प्रेम तथा स्नेह-भरी चितवनों से भगवान् की पूजा करते हैं। ।। १०-२१-११ ।।

hindi translation

dhanyAH sma mUDhagatayo'pi hariNya etA yA nandanandanamupAttavicitraveSam | AkarNya veNuraNitaM sahakRSNasArAH pUjAM dadhurviracitAM praNayAvalokaiH || 10-21-11 ||

hk transliteration by Sanscript