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पीनाहिभोगोत्थितमद्भुतं महज्ज्योतिः स्वधाम्ना ज्वलयद्दिशो दश । प्रतीक्ष्य खेऽवस्थितमीश निर्गमं विवेश तस्मिन् मिषतां दिवौकसाम् ।। १०-१२-३३ ।।

From the body of the gigantic python, a glaring effulgence came out, illuminating all directions, and stayed individually in the sky until Kṛṣṇa came out from the corpse’s mouth. Then, as all the demigods looked on, this effulgence entered into Kṛṣṇa’s body. ।। 10-12-33 ।।

english translation

उस विराट अजगर के शरीर से सारी दिशाओं को प्रकाशित करता हुआ एक प्रकाशमान तेज निकला और आकाश में अकेले तब तक रुका रहा जब तक कृष्ण उस शव के मुख से बाहर नहीं आ गये। तत्पश्चात् सारे देवताओं ने इस तेज को कृष्ण के शरीर में प्रवेश करते देखा। ।। १०-१२-३३ ।।

hindi translation

pInAhibhogotthitamadbhutaM mahajjyotiH svadhAmnA jvalayaddizo daza | pratIkSya khe'vasthitamIza nirgamaM viveza tasmin miSatAM divaukasAm || 10-12-33 ||

hk transliteration by Sanscript