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तत्कथा सुमहत्पुण्यं धन्यं स्वस्त्ययनं शुभम् । यत्र यत्रोत्तमश्लोको भगवान् गीयते हरिः ।। ८-१-३२ ।।

Any literature or narration in which the Supreme Personality of Godhead, Uttamaśloka, is described and glorified is certainly great, pure, glorious, auspicious and all good. ।। 8-1-32 ।।

english translation

कोई भी साहित्य या कथा जिसमें भगवान् उत्तमश्लोक का वर्णन और उनकी महिमा का गायन किया जाता है, वह निश्चय ही महान्, शुद्ध, धन्य, कल्याणप्रद तथा उत्तम है। ।। ८-१-३२ ।।

hindi translation

tatkathA sumahatpuNyaM dhanyaM svastyayanaM zubham | yatra yatrottamazloko bhagavAn gIyate hariH || 8-1-32 ||

hk transliteration by Sanscript