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यात्रामात्रं त्वहरहर्दैवादुपनमत्युत । नाधिकं तावता तुष्टः क्रियाश्चक्रे यथोचिताः ।। १०-८६-१५ ।।

By the will of Providence he obtained each day just what he needed for his maintenance, and no more. Satisfied with this much, he properly executed his religious duties. ।। 10-86-15 ।।

english translation

प्रोविडेंस की इच्छा से उसे हर दिन उतना ही मिलता था जितना उसे अपने भरण-पोषण के लिए चाहिए था, इससे अधिक नहीं। इतने से संतुष्ट होकर उन्होंने अपने धार्मिक कर्तव्यों का भलीभांति पालन किया। ।। १०-८६-१५ ।।

hindi translation

yAtrAmAtraM tvaharahardaivAdupanamatyuta | nAdhikaM tAvatA tuSTaH kriyAzcakre yathocitAH || 10-86-15 ||

hk transliteration by Sanscript