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न यत्र श्रवणादीनि रक्षोघ्नानि स्वकर्मसु । कुर्वन्ति सात्वतां भर्तुर्यातुधान्यश्च तत्र हि ।। १०-६-३ ।।

My dear King, wherever people in any position perform their occupational duties of devotional service by chanting and hearing [śravaṇaṁ kīrtanaṁ viṣṇoḥ], there cannot be any danger from bad elements. Therefore there was no need for anxiety about Gokula while the Supreme Personality of Godhead was personally present. ।। 10-6-3 ।।

english translation

हे राजन्! जहाँ भी लोग कीर्तन तथा श्रवण द्वारा भक्तिकार्यों की अपनी वृत्तियों में लगे रहते हैं (श्रवणं कीर्तनं विष्णो:) वहाँ बुरे लोगों से किसी प्रकार का खतरा नहीं रहता। जब साक्षात् भगवान् वहाँ विद्यमान हों तो गोकुल के विषय में किसी प्रकार की चिन्ता की आवश्यकता नहीं थी। ।। १०-६-३ ।।

hindi translation

na yatra zravaNAdIni rakSoghnAni svakarmasu | kurvanti sAtvatAM bharturyAtudhAnyazca tatra hi || 10-6-3 ||

hk transliteration by Sanscript