Progress:60.3%

भगवानाह न मणिं प्रतीच्छामो वयं नृप । तवास्तां देवभक्तस्य वयं च फलभागिनः ।। १०-५६-४५ ।।

The Supreme Personality of Godhead told Satrājit: We do not care to take this jewel back, O King. You are the sun-god’s devotee, so let it stay in your possession. Thus We will also enjoy its benefits. ।। 10-56-45 ।।

english translation

भगवान के परम व्यक्तित्व ने सत्रजित से कहा: हे राजा, हमें इस रत्न को वापस लेने की कोई परवाह नहीं है। आप सूर्यदेव के भक्त हैं, अत: इसे अपने अधिकार में ही रहने दीजिये। इस प्रकार हम भी इसका लाभ उठा सकेंगे। ।। १०-५६-४५ ।।

hindi translation

bhagavAnAha na maNiM pratIcchAmo vayaM nRpa | tavAstAM devabhaktasya vayaM ca phalabhAginaH || 10-56-45 ||

hk transliteration by Sanscript