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गुरुणैवमनुज्ञातौ रथेनानिलरंहसा । आयातौ स्वपुरं तात पर्जन्यनिनदेन वै ।। १०-४५-४९ ।।

Thus receiving Their guru’s permission to leave, the two Lords returned to Their city on Their chariot, which moved as swiftly as the wind and resounded like a cloud. ।। 10-45-49 ।।

english translation

इस तरह अपने गुरु से विदा होने की अनुमति पाकर दोनों भाई अपने रथ पर बैठ अपनी नगरी लौट आये। यह रथ वायु की तेजी से चल रहा था और बादल की तरह गूँज रहा था। ।। १०-४५-४९ ।।

hindi translation

guruNaivamanujJAtau rathenAnilaraMhasA | AyAtau svapuraM tAta parjanyaninadena vai || 10-45-49 ||

hk transliteration by Sanscript