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श्रीभगवानुवाच अहो अमी देव वरामरार्चितं पादाम्बुजं ते सुमनःफलार्हणम् । नमन्त्युपादाय शिखाभिरात्मनस्तमोऽपहत्यै तरुजन्म यत्कृतम् ।। १०-१५-५ ।।

The Supreme Personality of Godhead said: O greatest of Lords, just see how these trees are bowing their heads at Your lotus feet, which are worshipable by the immortal demigods. The trees are offering You their fruits and flowers to eradicate the dark ignorance that has caused their birth as trees. ।। 10-15-5 ।।

english translation

भगवान् ने कहा : हे देवश्रेष्ठ, देखें न, ये वृक्ष जो अमर देवताओं द्वारा पूज्य हैं आपके चरणकमलों पर किस तरह अपना सिर झुका रहे हैं। ये वृक्ष उस गहन अज्ञान को दूर करने के लिए आपको अपने फल तथा फूल अर्पित कर रहे हैं जिसके कारण उन्हें वृक्षों का जन्म धारण करना पड़ा है। ।। १०-१५-५ ।।

hindi translation

zrIbhagavAnuvAca aho amI deva varAmarArcitaM pAdAmbujaM te sumanaHphalArhaNam | namantyupAdAya zikhAbhirAtmanastamo'pahatyai tarujanma yatkRtam || 10-15-5 ||

hk transliteration by Sanscript