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उत्थायोत्थाय कृष्णस्य चिरस्य पादयोः पतन् । आस्ते महित्वं प्राग्दृष्टं स्मृत्वा स्मृत्वा पुनः पुनः ।। १०-१३-६३ ।।

Rising and falling again and again at the lotus feet of Lord Kṛṣṇa for a long time, Lord Brahmā remembered over and over the Lord’s greatness he had just seen. ।। 10-13-63 ।।

english translation

काफी देर तक भगवान् कृष्ण के चरणकमलों पर बारम्बार उठते हुए और फिर नमस्कार करते हुए ब्रह्मा ने भगवान् की उस महानता का पुन: पुन: स्मरण किया जिसे उन्होंने अभी अभी देखा था। ।। १०-१३-६३ ।।

hindi translation

utthAyotthAya kRSNasya cirasya pAdayoH patan | Aste mahitvaM prAgdRSTaM smRtvA smRtvA punaH punaH || 10-13-63 ||

hk transliteration by Sanscript