1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
•
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
32.
द्वात्रिंशोऽध्यायः
Chapter 32
33.
त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 33
Progress:55.8%
स उपव्रज्य वरदं प्रपन्नार्तिहरं हरिम् । अनुग्रहाय भक्तानामनुरूपात्मदर्शनम् ।। ३-२०-२५ ।।
sanskrit
He approached the Personality of Godhead, who bestows all boons and who dispels the agony of His devotees and of those who take shelter of His lotus feet. He manifests His innumerable transcendental forms for the satisfaction of His devotees. ।। 3-20-25 ।।
english translation
वे भगवान् श्री हरि के पास पहुँचे जो समस्त वरों को देने वाले तथा अपने भक्तों एवं अपने चरणों की शरण ग्रहण करने वालों की पीड़ा को हरने वाले हैं। वे अपने भक्तों की तुष्टि के लिए असंख्य दिव्य रूपों में प्रकट होते हैं। ।। ३-२०-२५ ।।
hindi translation
sa upavrajya varadaM prapannArtiharaM harim | anugrahAya bhaktAnAmanurUpAtmadarzanam || 3-20-25 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:55.8%
स उपव्रज्य वरदं प्रपन्नार्तिहरं हरिम् । अनुग्रहाय भक्तानामनुरूपात्मदर्शनम् ।। ३-२०-२५ ।।
sanskrit
He approached the Personality of Godhead, who bestows all boons and who dispels the agony of His devotees and of those who take shelter of His lotus feet. He manifests His innumerable transcendental forms for the satisfaction of His devotees. ।। 3-20-25 ।।
english translation
वे भगवान् श्री हरि के पास पहुँचे जो समस्त वरों को देने वाले तथा अपने भक्तों एवं अपने चरणों की शरण ग्रहण करने वालों की पीड़ा को हरने वाले हैं। वे अपने भक्तों की तुष्टि के लिए असंख्य दिव्य रूपों में प्रकट होते हैं। ।। ३-२०-२५ ।।
hindi translation
sa upavrajya varadaM prapannArtiharaM harim | anugrahAya bhaktAnAmanurUpAtmadarzanam || 3-20-25 ||
hk transliteration by Sanscript