Progress:78.7%

भ्राजद्वरमणिग्रीवं निवीतं वनमालया । पिबन्त इव चक्षुर्भ्यां लिहन्त इव जिह्वया ।। १०-७३-५ ।।

he kings seemed to drink His beauty with their eyes, lick Him with their tongues, relish His fragrance with their nostrils and embrace Him with their arms. ।। 10-73-5 ।।

english translation

ऐसा प्रतीत होता है कि राजा उनकी सुंदरता को अपनी आंखों से पीते हैं, अपनी जीभ से उन्हें चाटते हैं, अपनी नाक से उनकी सुगंध का आनंद लेते हैं और अपनी बाहों से उन्हें गले लगाते हैं। ।। १०-७३-५ ।।

hindi translation

bhrAjadvaramaNigrIvaM nivItaM vanamAlayA | pibanta iva cakSurbhyAM lihanta iva jihvayA || 10-73-5 ||

hk transliteration by Sanscript