स तं बिभ्रन् मणिं कण्ठे भ्राजमानो यथा रविः । प्रविष्टो द्वारकां राजंस्तेजसा नोपलक्षितः ॥ १०-५६-४ ॥
Wearing the jewel on his neck, Satrājit entered Dvārakā. He shone as brightly as the sun itself, O King, and thus he went unrecognized because of the jewel’s effulgence. ॥ 10-56-4 ॥
english translation
सत्राजित ने मणि गले में धारण करके द्वारका में प्रवेश किया। हे राजा, वह सूर्य के समान ही चमक रहा था, और इस प्रकार मणि की चमक के कारण वह पहचाना नहीं जा सका। ॥ १०-५६-४ ॥
hindi translation