विक्रीडितं व्रजवधूभिरिदं च विष्णोः श्रद्धान्वितोऽनुशृणुयादथ वर्णयेद्यः । भक्तिं परां भगवति प्रतिलभ्य कामं हृद्रोगमाश्वपहिनोत्यचिरेण धीरः ॥ १०-३३-४० ॥
Anyone who faithfully hears or describes the Lord’s playful affairs with the young gopīs of Vṛndāvana will attain the Lord’s pure devotional service. Thus he will quickly become sober and conquer lust, the disease of the heart. ॥ 10-33-40 ॥
english translation
जो कोई वृन्दावन की युवा-गोपिकाओं के साथ भगवान् की क्रीड़ाओं को श्रद्धापूर्वक सुनता है या उनका वर्णन करता है, वह भगवान् की शुद्ध भक्ति प्राप्त करेगा। इस तरह वह शीघ्र ही धीर बन जाएगा और हृदय रोग रूपी कामवासना को जीत लेगा। ॥ १०-३३-४० ॥
hindi translation