कर्दम उवाच तुष्टोऽहमद्य तव मानवि मानदायाः शुश्रूषया परमया परया च भक्त्या । यो देहिनामयमतीव सुहृत्स्वदेहो नावेक्षितः समुचितः क्षपितुं मदर्थे ॥ ३-२३-६ ॥
Kardama Muni said: O respectful daughter of Svāyambhuva Manu, today I am very much pleased with you for your great devotion and most excellent loving service. Since the body is so dear to embodied beings, I am astonished that you have neglected your own body to use it on my behalf. ॥ 3-23-6 ॥
english translation
कर्दम मुनि ने कहा—हे स्वायंभुव मनु की मानिनी पुत्री, आज मैं तुम्हारी अत्यधिक अनुरक्ति तथा प्रेमपूर्ण सेवा से बहुत प्रसन्न हूँ। चूँकि देहधारियों को शरीर अत्यन्त प्रिय है, अत: मुझे आश्चर्य हो रहा है कि तुमने मेरे लिये अपने शरीर को उपेक्षित कर रखा है। ॥ ३-२३-६ ॥
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