1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
•
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
32.
द्वात्रिंशोऽध्यायः
Chapter 32
33.
त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 33
Progress:59.5%
न वै जातु मृषैव स्यात्प्रजाध्यक्ष मदर्हणम् । भवद्विधेष्वतितरां मयि सङ्गृभितात्मनाम् ।। ३-२१-२४ ।।
sanskrit
The Lord continued: My dear ṛṣi, O leader of the living entities, for those who serve Me in devotion by worshiping Me, especially persons like you who have given up everything unto Me, there is never any question of frustration. ।। 3-21-24 ।।
english translation
भगवान् ने आगे कहा—हे ऋषि, हे जीवात्माओं के अध्यक्ष, जो लोग मेरी पूजा द्वारा भक्तिपूर्वक मेरी सेवा करते हैं, विशेष रूप से तुम जैसे पुरुष जिन्होंने अपना सर्वस्व मुझे अर्पित कर रखा है, उन्हें निराश होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। ।। ३-२१-२४ ।।
hindi translation
na vai jAtu mRSaiva syAtprajAdhyakSa madarhaNam | bhavadvidheSvatitarAM mayi saGgRbhitAtmanAm || 3-21-24 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:59.5%
न वै जातु मृषैव स्यात्प्रजाध्यक्ष मदर्हणम् । भवद्विधेष्वतितरां मयि सङ्गृभितात्मनाम् ।। ३-२१-२४ ।।
sanskrit
The Lord continued: My dear ṛṣi, O leader of the living entities, for those who serve Me in devotion by worshiping Me, especially persons like you who have given up everything unto Me, there is never any question of frustration. ।। 3-21-24 ।।
english translation
भगवान् ने आगे कहा—हे ऋषि, हे जीवात्माओं के अध्यक्ष, जो लोग मेरी पूजा द्वारा भक्तिपूर्वक मेरी सेवा करते हैं, विशेष रूप से तुम जैसे पुरुष जिन्होंने अपना सर्वस्व मुझे अर्पित कर रखा है, उन्हें निराश होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। ।। ३-२१-२४ ।।
hindi translation
na vai jAtu mRSaiva syAtprajAdhyakSa madarhaNam | bhavadvidheSvatitarAM mayi saGgRbhitAtmanAm || 3-21-24 ||
hk transliteration by Sanscript