1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
•
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
32.
द्वात्रिंशोऽध्यायः
Chapter 32
33.
त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 33
Progress:35.9%
स वज्रकूटाङ्गनिपातवेगविशीर्णकुक्षिः स्तनयन्नुदन्वान् । उत्सृष्टदीर्घोर्मिभुजैरिवार्तश्चुक्रोश यज्ञेश्वर पाहि मेति ।। ३-१३-२९ ।।
sanskrit
Diving into the water like a giant mountain, Lord Boar divided the middle of the ocean, and two high waves appeared as the arms of the ocean, which cried loudly as if praying to the Lord, “O Lord of all sacrifices, please do not cut me in two! Kindly give me protection!” ।। 3-13-29 ।।
english translation
दानवाकार पर्वत की भाँति जल में गोता लगाते हुए भगवान् वराह ने समुद्र के मध्यभाग को विभाजित कर दिया और दो ऊँची लहरें समुद्र की भुजाओं की तरह प्रकट हुईं जो उच्च स्वर से आर्तनाद कर रही थीं मानो भगवान् से प्रार्थना कर रही हों,“हे समस्त यज्ञों के स्वामी, कृपया मेरे दो खण्ड न करें। कृपा करके मुझे संरक्षण प्रदान करें।” ।। ३-१३-२९ ।।
hindi translation
sa vajrakUTAGganipAtavegavizIrNakukSiH stanayannudanvAn | utsRSTadIrghormibhujairivArtazcukroza yajJezvara pAhi meti || 3-13-29 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:35.9%
स वज्रकूटाङ्गनिपातवेगविशीर्णकुक्षिः स्तनयन्नुदन्वान् । उत्सृष्टदीर्घोर्मिभुजैरिवार्तश्चुक्रोश यज्ञेश्वर पाहि मेति ।। ३-१३-२९ ।।
sanskrit
Diving into the water like a giant mountain, Lord Boar divided the middle of the ocean, and two high waves appeared as the arms of the ocean, which cried loudly as if praying to the Lord, “O Lord of all sacrifices, please do not cut me in two! Kindly give me protection!” ।। 3-13-29 ।।
english translation
दानवाकार पर्वत की भाँति जल में गोता लगाते हुए भगवान् वराह ने समुद्र के मध्यभाग को विभाजित कर दिया और दो ऊँची लहरें समुद्र की भुजाओं की तरह प्रकट हुईं जो उच्च स्वर से आर्तनाद कर रही थीं मानो भगवान् से प्रार्थना कर रही हों,“हे समस्त यज्ञों के स्वामी, कृपया मेरे दो खण्ड न करें। कृपा करके मुझे संरक्षण प्रदान करें।” ।। ३-१३-२९ ।।
hindi translation
sa vajrakUTAGganipAtavegavizIrNakukSiH stanayannudanvAn | utsRSTadIrghormibhujairivArtazcukroza yajJezvara pAhi meti || 3-13-29 ||
hk transliteration by Sanscript