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तान्निरीक्ष्य वरारोहा सरूपान् सूर्यवर्चसः । अजानती पतिं साध्वी अश्विनौ शरणं ययौ ।। ९-३-१६ ।।

The chaste and very beautiful Sukanyā could not distinguish her husband from the two Aśvinī-kumāras, for they were equally beautiful. Not understanding who her real husband was, she took shelter of the Aśvinī-kumāras. ।। 9-3-16 ।।

english translation

साध्वी एवं परम सुन्दरी सुकन्या अपने पति एवं उन दोनों अश्विनीकुमारों में अन्तर न कर पाई क्योंकि वे समान रूप से सुन्दर थे। अतएव अपने असली पति को पहचान पाने में असमर्थ होने के कारण उसने अश्विनीकुमारों की शरण ग्रहण की। ।। ९-३-१६ ।।

hindi translation

tAnnirIkSya varArohA sarUpAn sUryavarcasaH | ajAnatI patiM sAdhvI azvinau zaraNaM yayau || 9-3-16 ||

hk transliteration by Sanscript

दर्शयित्वा पतिं तस्यै पातिव्रत्येन तोषितौ । ऋषिमामन्त्र्य ययतुर्विमानेन त्रिविष्टपम् ।। ९-३-१७ ।।

The Aśvinī-kumāras were very pleased to see Sukanyā’s chastity and faithfulness. Thus they showed her Cyavana Muni, her husband, and after taking permission from him, they returned to the heavenly planets in their plane. ।। 9-3-17 ।।

english translation

दोनों अश्विनीकुमार सुकन्या के सतीत्व एवं निष्ठा को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। अत: उन्होंने उसे उसके पति च्यवन मुनि को दिखलाया और फिर उनसे अनुमति लेकर वे अपने विमान से स्वर्गलोक को वापस लौट गये। ।। ९-३-१७ ।।

hindi translation

darzayitvA patiM tasyai pAtivratyena toSitau | RSimAmantrya yayaturvimAnena triviSTapam || 9-3-17 ||

hk transliteration by Sanscript

यक्ष्यमाणोऽथ शर्यातिश्च्यवनस्याश्रमं गतः । ददर्श दुहितुः पार्श्वे पुरुषं सूर्यवर्चसम् ।। ९-३-१८ ।।

Thereafter, King Śaryāti, desiring to perform a sacrifice, went to the residence of Cyavana Muni. There he saw by the side of his daughter a very beautiful young man, as bright as the sun. ।। 9-3-18 ।।

english translation

तत्पश्चात् यज्ञ सम्पन्न करने की इच्छा से राजा शर्याति च्यवन मुनि के आवास में गये। वहाँ उन्होंने अपनी पुत्री के बगल में सूर्य के समान एक तेजस्वी सुन्दर तरुण पुरुष को देखा। ।। ९-३-१८ ।।

hindi translation

yakSyamANo'tha zaryAtizcyavanasyAzramaM gataH | dadarza duhituH pArzve puruSaM sUryavarcasam || 9-3-18 ||

hk transliteration by Sanscript

राजा दुहितरं प्राह कृतपादाभिवन्दनाम् । आशिषश्चाप्रयुञ्जानो नातिप्रीतमना इव ।। ९-३-१९ ।।

After receiving obeisances from his daughter, the King, instead of offering blessings to her, appeared very displeased and spoke as follows. ।। 9-3-19 ।।

english translation

राजा की पुत्री ने पिता के चरणों की वन्दना की, किन्तु राजा उसे आशीष देने की बजाय उससे अत्यधिक अप्रसन्न प्रतीत हुआ और उससे इस प्रकार बोला। ।। ९-३-१९ ।।

hindi translation

rAjA duhitaraM prAha kRtapAdAbhivandanAm | AziSazcAprayuJjAno nAtiprItamanA iva || 9-3-19 ||

hk transliteration by Sanscript

चिकीर्षितं ते किमिदं पतिस्त्वया प्रलम्भितो लोकनमस्कृतो मुनिः । यत्त्वं जराग्रस्तमसत्यसम्मतं विहाय जारं भजसेऽमुमध्वगम् ।। ९-३-२० ।।

O unchaste girl, what is this that you have desired to do? You have cheated the most respectable husband, who is honored by everyone, for I see that because he was old, diseased and therefore unattractive, you have left his company to accept as your husband this young man, who appears to be a beggar from the street. ।। 9-3-20 ।।

english translation

हे दुष्ट लडक़ी, तुमने यह क्या कर दिया? तुमने अपने अत्यन्त सम्माननीय पति को धोखा दिया है क्योंकि मैं देख रहा हूँ कि उसके वृद्ध, रोगग्रस्त तथा अनाकर्षक होने के कारण तुमने उसका साथ छोडक़र इस तरुण पुरुष को अपना पति बनाना चाहा है जो भिक्षुक जैसा प्रतीत होता है। ।। ९-३-२० ।।

hindi translation

cikIrSitaM te kimidaM patistvayA pralambhito lokanamaskRto muniH | yattvaM jarAgrastamasatyasammataM vihAya jAraM bhajase'mumadhvagam || 9-3-20 ||

hk transliteration by Sanscript