1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
•
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
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कस्यचित्त्वथ कालस्य नासत्यावाश्रमागतौ । तौ पूजयित्वा प्रोवाच वयो मे दत्तमीश्वरौ ।। ९-३-११ ।।
Thereafter, some time having passed, the Aśvinī-kumāra brothers, the heavenly physicians, happened to come to Cyavana Muni’s āśrama. After offering them respectful obeisances, Cyavana Muni requested them to give him youthful life, for they were able to do so. ।। 9-3-11 ।।
english translation
कुछ काल बीतने के बाद दोनों अश्विनीकुमार जो स्वर्गलोक के वैद्य थे, च्यवन मुनि के आश्रम आये। उनका सत्कार करने के बाद च्यवन मुनि ने उनसे यौवन प्रदान करने के लिए प्रार्थना की क्योंकि वे ऐसा करने में सक्षम थे। ।। ९-३-११ ।।
hindi translation
kasyacittvatha kAlasya nAsatyAvAzramAgatau | tau pUjayitvA provAca vayo me dattamIzvarau || 9-3-11 ||
hk transliteration by Sanscriptग्रहं ग्रहीष्ये सोमस्य यज्ञे वामप्यसोमपोः । क्रियतां मे वयोरूपं प्रमदानां यदीप्सितम् ।। ९-३-१२ ।।
Cyavana Muni said: Although you are ineligible to drink soma-rasa in sacrifices, I promise to give you a full pot of it. Kindly arrange beauty and youth for me, because they are attractive to young women. ।। 9-3-12 ।।
english translation
च्यवन मुनि ने कहा : यद्यपि तुम दोनों यज्ञ में सोमरस पीने के पात्र नहीं हो, किन्तु मैं वचन देता हूँ कि मैं तुम्हें सोमरस का पूरा बर्तन भर कर दूँगा। कृपा करके मेरे लिए सौन्दर्य तथा तारुण्य की व्यवस्था करो क्योंकि तरुणी स्त्रियों को ये आकर्षक लगते हैं। ।। ९-३-१२ ।।
hindi translation
grahaM grahISye somasya yajJe vAmapyasomapoH | kriyatAM me vayorUpaM pramadAnAM yadIpsitam || 9-3-12 ||
hk transliteration by Sanscriptबाढमित्यूचतुर्विप्रमभिनन्द्य भिषक्तमौ । निमज्जतां भवानस्मिन् ह्रदे सिद्धविनिर्मिते ।। ९-३-१३ ।।
The great physicians, the Aśvinī-kumāras, very gladly accepted Cyavana Muni’s proposal. Thus they told the brāhmaṇa, “Just dive into this lake of successful life.” [One who bathes in this lake has his desires fulfilled.] ।। 9-3-13 ।।
english translation
उन महान् वैद्य अश्विनीकुमारों ने च्यवन मुनि के प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने उस ब्राह्मण से कहा “आप इस सिद्धिदायक झील में गोता लगाइये। (जो इस झील में नहाता है उसकी कामनाएँ पूरी होती हैं)। ।। ९-३-१३ ।।
hindi translation
bADhamityUcaturvipramabhinandya bhiSaktamau | nimajjatAM bhavAnasmin hrade siddhavinirmite || 9-3-13 ||
hk transliteration by Sanscriptइत्युक्त्वा जरया ग्रस्तदेहो धमनिसन्ततः । ह्रदं प्रवेशितोऽश्विभ्यां वलीपलितविप्रियः ।। ९-३-१४ ।।
After saying this, the Aśvinī-kumāras caught hold of Cyavana Muni, who was an old, diseased invalid with loose skin, white hair, and veins visible all over his body, and all three of them entered the lake. ।। 9-3-14 ।।
english translation
यह कहकर अश्विनीकुमारों ने च्यवन मुनि को पकड़ा जो वृद्ध थे और जिनके रुग्ण शरीर की चमड़ी झूल रही थी, बाल सफेद थे तथा सारे शरीर में नसें दिख रही थीं और वे तीनों उस झील में घुस गये। ।। ९-३-१४ ।।
hindi translation
ityuktvA jarayA grastadeho dhamanisantataH | hradaM pravezito'zvibhyAM valIpalitavipriyaH || 9-3-14 ||
hk transliteration by Sanscriptपुरुषास्त्रय उत्तस्थुरपीच्या वनिताप्रियाः । पद्मस्रजः कुण्डलिनस्तुल्यरूपाः सुवाससः ।। ९-३-१५ ।।
Thereafter, three men with very beautiful bodily features emerged from the lake. They were nicely dressed and decorated with earrings and garlands of lotuses. All of them were of the same standard of beauty. ।। 9-3-15 ।।
english translation
तत्पश्चात् झील से तीन अत्यन्त सुन्दर स्वरूप वाले व्यक्ति ऊपर उठे। वे अच्छे वस्त्र धारण किये थे और कुण्डलों तथा कमल की मालाओं से विभूषित तीनों ही समान सुन्दरता वाले थे। ।। ९-३-१५ ।।
hindi translation
puruSAstraya uttasthurapIcyA vanitApriyAH | padmasrajaH kuNDalinastulyarUpAH suvAsasaH || 9-3-15 ||
hk transliteration by Sanscript