प्रोक्तं किलैतद्भगवत्तमेन निवृत्तिधर्माभिरताय तेन । सनत्कुमाराय स चाह पृष्टः साङ्ख्यायनायाङ्ग धृतव्रताय ॥ ३-८-७ ॥
Lord Saṅkarṣaṇa thus spoke the purport of Śrīmad-Bhāgavatam to the great sage Sanat-kumāra, who had already taken the vow of renunciation. Sanat-kumāra also, in his turn, when inquired of by Sāṅkhyāyana Muni, explained Śrīmad-Bhāgavatam as he had heard it from Saṅkarṣaṇa. ॥ 3-8-7 ॥
english translation
इस तरह भगवान् संकर्षण ने उन महर्षि सनत्कुमार से श्रीमद्भागवत का भावार्थ कहा जिन्होंने पहले से वैराग्य का व्रत ले रखा था। सनत्कुमार ने भी अपनी पारी में सांख्यायन मुनि द्वारा पूछे जाने पर श्रीमद्भागवत को उसी रूप में बतलाया जिस रूप में उन्होंने संकर्षण से सुना था। ॥ ३-८-७ ॥
hindi translation