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सत्याशिषो हि भगवंस्तव पादपद्ममाशीस्तथानुभजतः पुरुषार्थमूर्तेः । अप्येवमार्य भगवान् परिपाति दीनान् वाश्रेव वत्सकमनुग्रहकातरोऽस्मान् ।। ४-९-१७ ।।

My Lord, O Supreme Lord, You are the supreme personified form of all benediction. Therefore, for one who abides in Your devotional service with no other desire, worshiping Your lotus feet is better than becoming king and lording it over a kingdom. That is the benediction of worshiping Your lotus feet. To ignorant devotees like me, You are the causelessly merciful maintainer, just like a cow, who takes care of the newly born calf by supplying milk and giving it protection from attack. ।। 4-9-17 ।।

english translation

हे भगवन्, हे परमेश्वर, आप सभी वरों के परम साक्षात् रूप हैं, अत: जो बिना किसी कामना के आपकी भक्ति पर दृढ़ रहता है, उसके लिए राजा बनने तथा राज करने की अपेक्षा आपके चरण-कमलों की रज श्रेयस्कर है। आपके चरणकमल की पूजा का यही वरदान है। आप अपनी अहैतुकी कृपा से मुझ जैसे अज्ञानी भक्त के लिए पूर्ण परिपालक हैं, जिस प्रकार गाय अपने नवजात बछड़े को दूध पिलाती है और हमले से उसकी रक्षा करके उसकी देखभाल करती है। ।। ४-९-१७ ।।

hindi translation

satyAziSo hi bhagavaMstava pAdapadmamAzIstathAnubhajataH puruSArthamUrteH | apyevamArya bhagavAn paripAti dInAn vAzreva vatsakamanugrahakAtaro'smAn || 4-9-17 ||

hk transliteration by Sanscript