1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
•
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
Progress:23.3%
पदं त्रिभुवनोत्कृष्टं जिगीषोः साधु वर्त्म मे । ब्रूह्यस्मत्पितृभिर्ब्रह्मन्नन्यैरप्यनधिष्ठितम् ।। ४-८-३७ ।।
sanskrit
O learned brāhmaṇa, I want to occupy a position more exalted than any yet achieved within the three worlds by anyone, even by my father and grandfather. If you will oblige, kindly advise me of an honest path to follow by which I can achieve the goal of my life. ।। 4-8-37 ।।
english translation
हे विद्वान् ब्राह्मण, मैं ऐसा पद ग्रहण करना चाहता हूँ जिसे अभी तक तीनों लोकों में किसी ने भी, यहाँ तक कि मेरे पिता तथा पितामहों ने भी, ग्रहण न किया हो। यदि आप अनुगृहीत कर सकें तो कृपा करके मुझे ऐसे सत्य मार्ग की सलाह दें, जिसे अपना करके मैं अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकूँ। ।। ४-८-३७ ।।
hindi translation
padaM tribhuvanotkRSTaM jigISoH sAdhu vartma me | brUhyasmatpitRbhirbrahmannanyairapyanadhiSThitam || 4-8-37 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
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पदं त्रिभुवनोत्कृष्टं जिगीषोः साधु वर्त्म मे । ब्रूह्यस्मत्पितृभिर्ब्रह्मन्नन्यैरप्यनधिष्ठितम् ।। ४-८-३७ ।।
sanskrit
O learned brāhmaṇa, I want to occupy a position more exalted than any yet achieved within the three worlds by anyone, even by my father and grandfather. If you will oblige, kindly advise me of an honest path to follow by which I can achieve the goal of my life. ।। 4-8-37 ।।
english translation
हे विद्वान् ब्राह्मण, मैं ऐसा पद ग्रहण करना चाहता हूँ जिसे अभी तक तीनों लोकों में किसी ने भी, यहाँ तक कि मेरे पिता तथा पितामहों ने भी, ग्रहण न किया हो। यदि आप अनुगृहीत कर सकें तो कृपा करके मुझे ऐसे सत्य मार्ग की सलाह दें, जिसे अपना करके मैं अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकूँ। ।। ४-८-३७ ।।
hindi translation
padaM tribhuvanotkRSTaM jigISoH sAdhu vartma me | brUhyasmatpitRbhirbrahmannanyairapyanadhiSThitam || 4-8-37 ||
hk transliteration by Sanscript