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क्रुद्धः सुदष्टौष्ठपुटः स धूर्जटिर्जटां तडिद्वह्निसटोग्ररोचिषम् । उत्कृत्य रुद्रः सहसोत्थितो हसन् गम्भीरनादो विससर्ज तां भुवि ।। ४-५-२ ।।

Thus Lord Śiva, being extremely angry, pressed his lips with his teeth and immediately snatched from his head a strand of hair which blazed like electricity or fire. He stood up at once, laughing like a madman, and dashed the hair to the ground. ।। 4-5-2 ।।

english translation

इस प्रकार अत्यधिक क्रुद्ध होने के कारण शिव ने अपने दाँतों से होठ चबाते हुए तुरन्त अपने सिर की जटाओं से एक लट नोच ली, जो बिजली अथवा अग्नि की भाँति जलने लगी। वे पागल की भाँति हँसते हुए तुरन्त खड़े हो गये और उस लट को पृथ्वी पर पटक दिया। ।। ४-५-२ ।।

hindi translation

kruddhaH sudaSTauSThapuTaH sa dhUrjaTirjaTAM taDidvahnisaTograrociSam | utkRtya rudraH sahasotthito hasan gambhIranAdo visasarja tAM bhuvi || 4-5-2 ||

hk transliteration by Sanscript