1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
•
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
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का त्वं कञ्जपलाशाक्षि कस्यासीह कुतः सति । इमामुप पुरीं भीरु किं चिकीर्षसि शंस मे ।। ४-२५-२६ ।।
My dear lotus-eyed, kindly explain to me where you are coming from, who you are, and whose daughter you are. You appear very chaste. What is the purpose of your coming here? What are you trying to do? Please explain all these things to me. ।। 4-25-26 ।।
english translation
हे कमलनयनी, कृपा करके मुझे बताओ कि तुम कहाँ से आ रही हो, तुम कौन हो और तुम किसकी पुत्री हो? तुम अत्यन्त साध्वी लगती हो। यहाँ आने का तुम्हारा क्या प्रजोजन है? तुम क्या करना चाह रही हो? कृपया ये सारी बातें मुझसे कहो। ।। ४-२५-२६ ।।
hindi translation
kA tvaM kaJjapalAzAkSi kasyAsIha kutaH sati | imAmupa purIM bhIru kiM cikIrSasi zaMsa me || 4-25-26 ||
hk transliteration by Sanscriptक एतेऽनुपथा ये त एकादश महाभटाः । एता वा ललनाः सुभ्रु कोऽयं तेऽहिः पुरःसरः ।। ४-२५-२७ ।।
My dear lotus-eyed, who are those eleven strong bodyguards with you, and who are those ten specific servants? Who are those women following the ten servants, and who is the snake that is preceding you? ।। 4-25-27 ।।
english translation
हे कमलनयनी, तुम्हारे साथ के ग्यारह बलिष्ट अंगरक्षक और ये दस विशिष्ट सेवक कौन हैं? इन दस सेवकों के पीछे-पीछे ये स्त्रियाँ कौन हैं तथा तुम्हारे आगे-आगे चलने वाला यह सर्प कौन है? ।। ४-२५-२७ ।।
hindi translation
ka ete'nupathA ye ta ekAdaza mahAbhaTAH | etA vA lalanAH subhru ko'yaM te'hiH puraHsaraH || 4-25-27 ||
hk transliteration by Sanscriptत्वं ह्रीर्भवान्यस्यथवाग्रमा पतिं विचिन्वती किं मुनिवद्रहो वने । त्वदङ्घ्रिकामाप्तसमस्तकामं क्व पद्मकोशः पतितः कराग्रात् ।। ४-२५-२८ ।।
My dear beautiful girl, you are exactly like the goddess of fortune or the wife of Lord Śiva or the goddess of learning, the wife of Lord Brahmā. Although you must be one of them, I see that you are loitering in this forest. Indeed, you are as silent as the great sages. Is it that you are searching after your own husband? Whoever your husband may be, simply by understanding that you are so faithful to him, he will come to possess all opulences. I think you must be the goddess of fortune, but I do not see the lotus flower in your hand. Therefore I am asking you where you have thrown that lotus. ।। 4-25-28 ।।
english translation
हे सुन्दर बाला, तुम साक्षात् लक्ष्मी या भगवान् शिव की पत्नी भवानी अथवा ब्रह्मा की पत्नी अर्थात् विद्या की देवी सरस्वती के समान हो। यद्यपि तुम अवश्यमेव इनमें से एक हो, किन्तु मैं तुम्हें इस वन में अकेले विचरण करती देख रहा हूँ। निस्सन्देह, तुम मुनियों की भाँति मौन हो। ऐसा तो नहीं है कि तुम अपने पति को खोज रही हो? चाहे तुम्हारा पति जो कोई भी हो, किन्तु जिस तन्मयता से तुम उसे खोज रही हो यह देखकर उसे सारे ऐश्वर्य प्राप्त हो जाएँगे। मैं सोचता हूँ कि तुम लक्ष्मी हो, किन्तु तुम्हारे हाथ में कमल पुष्प नहीं है, अत: मैं पूछ रहा हूँ कि तुमने उसे कहाँ फेंक दिया? ।। ४-२५-२८ ।।
hindi translation
tvaM hrIrbhavAnyasyathavAgramA patiM vicinvatI kiM munivadraho vane | tvadaGghrikAmAptasamastakAmaM kva padmakozaH patitaH karAgrAt || 4-25-28 ||
hk transliteration by Sanscriptनासां वरोर्वन्यतमा भुविस्पृक् पुरीमिमां वीरवरेण साकम् । अर्हस्यलङ्कर्तुमदभ्रकर्मणा लोकं परं श्रीरिव यज्ञपुंसा ।। ४-२५-२९ ।।
O greatly fortunate one, it appears that you are none of the women I have mentioned because I see that your feet are touching the ground. But if you are some woman of this planet, you can, like the goddess of fortune — who, accompanied by Lord Viṣṇu, increases the beauty of the Vaikuṇṭha planets — also increase the beauty of this city by associating with me. You should understand that I am a great hero and a very powerful king on this planet. ।। 4-25-29 ।।
english translation
हे परम सौभाग्यशालिनी, ऐसा लगता है कि मैंने जिन स्त्रियों के नाम गिनाये हैं उनमें से तुम कोई नहीं हो, क्योंकि मैं देख रहा हूँ कि तुम्हारे पाँव पृथ्वी का स्पर्श कर रहे हैं। किन्तु यदि तुम इस लोक की कोई सुन्दरी हो, तो जिस प्रकार लक्ष्मी जी विष्णु के साथ वैकुण्ठलोक की श्रीवृद्धि करती हैं, उसी प्रकार तुम भी मेरे साथ संगति करके इस नगरी की सुन्दरता बढ़ाओ। तुम्हें ज्ञात हो कि मैं महान् वीर हूँ और इस लोक का अत्यन्त पराक्रमी राजा हूँ। ।। ४-२५-२९ ।।
hindi translation
nAsAM varorvanyatamA bhuvispRk purImimAM vIravareNa sAkam | arhasyalaGkartumadabhrakarmaNA lokaM paraM zrIriva yajJapuMsA || 4-25-29 ||
hk transliteration by Sanscriptयदेष मापाङ्गविखण्डितेन्द्रियं सव्रीडभावस्मितविभ्रमद्भ्रुवा । त्वयोपसृष्टो भगवान् मनोभवः प्रबाधतेऽथानुगृहाण शोभने ।। ४-२५-३० ।।
Certainly your glancing upon me today has very much agitated my mind. Your smile, which is full of shyness but at the same time lusty, is agitating the most powerful cupid within me. Therefore, O most beautiful, I ask you to be merciful upon me. ।। 4-25-30 ।।
english translation
सचमुच तुम्हारी चितवन ने आज मेरे मन को अत्यन्त विचलित कर दिया है। तुम्हारी मुस्कान लज्जायुक्त होकर भी अत्यन्त कामयुक्त होने के कारण मेरे अन्तर में परम शक्तिशाली कामदेव को जाग्रत कर रही है। अत: हे सुन्दरी, मैं तुमसे कृपा की याचना करता हूँ। ।। ४-२५-३० ।।
hindi translation
yadeSa mApAGgavikhaNDitendriyaM savrIDabhAvasmitavibhramadbhruvA | tvayopasRSTo bhagavAn manobhavaH prabAdhate'thAnugRhANa zobhane || 4-25-30 ||
hk transliteration by Sanscript