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देव्य ऊचुः अहो इयं वधूर्धन्या या चैवं भूभुजां पतिम् । सर्वात्मना पतिं भेजे यज्ञेशं श्रीर्वधूरिव ।। ४-२३-२५ ।।

The wives of the demigods said: All glories to Queen Arci! We can see that this queen of the great King Pṛthu, the emperor of all the kings of the world, has served her husband with mind, speech and body exactly as the goddess of fortune serves the Supreme Personality of Godhead, Yajñeśa, or Viṣṇu. ।। 4-23-25 ।।

english translation

देवताओं की पत्नियों ने कहा : महारानी अर्चि धन्य हैं! हम देख रही हैं कि राज राजेश्वर पृथु की इस महारानी ने अपने पति की अपने मन, वाणी तथा शरीर से उसी प्रकार सेवा की है, जिस प्रकार ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी भगवान् यज्ञेश अथवा विष्णु की करती हैं। ।। ४-२३-२५ ।।

hindi translation

devya UcuH aho iyaM vadhUrdhanyA yA caivaM bhUbhujAM patim | sarvAtmanA patiM bheje yajJezaM zrIrvadhUriva || 4-23-25 ||

hk transliteration by Sanscript