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सर्गादि योऽस्यानुरुणद्धि शक्तिभिर्द्रव्यक्रियाकारकचेतनात्मभिः । तस्मै समुन्नद्धनिरुद्धशक्तयेनमः परस्मै पुरुषाय वेधसे ।। ४-१७-३३ ।।

My dear Lord, by Your own potencies You are the original cause of the material elements, the performing instruments (the senses), the workers of the senses (the controlling demigods), the intelligence and the ego, as well as everything else. By Your energy You manifest this entire cosmic creation, maintain it and dissolve it. Through Your energy alone everything is sometimes manifest and sometimes not manifest. You are therefore the Supreme Personality of Godhead, the cause of all causes. I offer my respectful obeisances unto You. ।। 4-17-33 ।।

english translation

हे भगवन्, आप अपनी शक्तियों द्वारा भौतिक तत्त्वों, इन्द्रियों, इनके नियामक देवों, बुद्धि, अहंकार तथा प्रत्येक वस्तु के आदि कारण हैं। अपनी शक्ति से आप इस सम्पूर्ण दृश्य जगत की सृष्टि, पालन और संहार करते हैं। आपकी ही शक्ति से प्रत्येक वस्तु कभी प्रकट होती है और कभी प्रकट नहीं होती है। अत: आप समस्त कारणों के कारण पुरुषोत्तम भगवान् हैं। मैं आपको सादर नमस्कार करती हूँ। ।। ४-१७-३३ ।।

hindi translation

sargAdi yo'syAnuruNaddhi zaktibhirdravyakriyAkArakacetanAtmabhiH | tasmai samunnaddhaniruddhazaktayenamaH parasmai puruSAya vedhase || 4-17-33 ||

hk transliteration by Sanscript