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नादण्ड्यं दण्डयत्येष सुतमात्मद्विषामपि । दण्डयत्यात्मजमपि दण्ड्यं धर्मपथे स्थितः ।। ४-१६-१३ ।।

Since this King will always remain on the path of piety, he will be neutral to both his son and the son of his enemy. If the son of his enemy is not punishable, he will not punish him, but if his own son is punishable, he will immediately punish him. ।। 4-16-13 ।।

english translation

चूँकि यह राजा सदैव धर्मनिष्ठा के मार्ग पर रहेगा, अत: वह अपने पुत्र तथा अपने शत्रु के पुत्र दोनों के प्रति समभाव रखेगा। यदि उसके शत्रु का पुत्र दण्डनीय नहीं है, तो वह उसे दण्ड नहीं देगा, किन्तु यदि स्वयं का पुत्र दण्डनीय है, तो उसे दंडित करेगा। ।। ४-१६-१३ ।।

hindi translation

nAdaNDyaM daNDayatyeSa sutamAtmadviSAmapi | daNDayatyAtmajamapi daNDyaM dharmapathe sthitaH || 4-16-13 ||

hk transliteration by Sanscript