1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
•
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
32.
द्वात्रिंशोऽध्यायः
Chapter 32
33.
त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 33
Progress:39.8%
नमो रुद्राय महते देवायोग्राय मीढुषे । शिवाय न्यस्तदण्डाय धृतदण्डाय मन्यवे ।। ३-१४-३४ ।।
sanskrit
Let me offer my obeisances unto the angry Lord Śiva, who is simultaneously the very ferocious great demigod and the fulfiller of all material desires. He is all-auspicious and forgiving, but his anger can immediately move him to chastise. ।। 3-14-34 ।।
english translation
मैं उन क्रुद्ध शिवजी को नमस्कार करती हूँ जो एक ही साथ अत्यन्त उग्र महादेव तथा समस्त इच्छाओं को पूरा करने वाले हैं। वे सर्वकल्याणप्रद तथा क्षमाशील हैं, किन्तु उनका क्रोध उन्हें तुरन्त ही दण्ड देने के लिए चलायमान कर सकता है। ।। ३-१४-३४ ।।
hindi translation
namo rudrAya mahate devAyogrAya mIDhuSe | zivAya nyastadaNDAya dhRtadaNDAya manyave || 3-14-34 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:39.8%
नमो रुद्राय महते देवायोग्राय मीढुषे । शिवाय न्यस्तदण्डाय धृतदण्डाय मन्यवे ।। ३-१४-३४ ।।
sanskrit
Let me offer my obeisances unto the angry Lord Śiva, who is simultaneously the very ferocious great demigod and the fulfiller of all material desires. He is all-auspicious and forgiving, but his anger can immediately move him to chastise. ।। 3-14-34 ।।
english translation
मैं उन क्रुद्ध शिवजी को नमस्कार करती हूँ जो एक ही साथ अत्यन्त उग्र महादेव तथा समस्त इच्छाओं को पूरा करने वाले हैं। वे सर्वकल्याणप्रद तथा क्षमाशील हैं, किन्तु उनका क्रोध उन्हें तुरन्त ही दण्ड देने के लिए चलायमान कर सकता है। ।। ३-१४-३४ ।।
hindi translation
namo rudrAya mahate devAyogrAya mIDhuSe | zivAya nyastadaNDAya dhRtadaNDAya manyave || 3-14-34 ||
hk transliteration by Sanscript