1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
•
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
Progress:15.9%
त्वमेव धर्मार्थदुघाभिपत्तये दक्षेण सूत्रेण ससर्जिथाध्वरम् । त्वयैव लोकेऽवसिताश्च सेतवो यान् ब्राह्मणाः श्रद्दधते धृतव्रताः ।। ४-६-४४ ।।
sanskrit
My dear lord, Your Lordship has introduced the system of sacrifices through the agency of Dakṣa, and thus one may derive the benefits of religious activities and economic development. Under your regulative principles, the institution of the four varṇās and āśramas is respected. The brāhmaṇas therefore vow to follow this system strictly. ।। 4-6-44 ।।
english translation
हे भगवान्, आपने दक्ष को माध्यम बनाकर यज्ञ-प्रथा चलाई है, जिससे मनुष्य धार्मिक कृत्य तथा आर्थिक विकास का लाभ उठा सकता है। आपके ही नियामक विधानों से चारों वर्णों तथा आश्रमों को सम्मानित किया जाता है। अत: ब्राह्मण इस प्रथा का दृढ़तापूर्वक पालन करने का व्रत लेते हैं। ।। ४-६-४४ ।।
hindi translation
tvameva dharmArthadughAbhipattaye dakSeNa sUtreNa sasarjithAdhvaram | tvayaiva loke'vasitAzca setavo yAn brAhmaNAH zraddadhate dhRtavratAH || 4-6-44 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:15.9%
त्वमेव धर्मार्थदुघाभिपत्तये दक्षेण सूत्रेण ससर्जिथाध्वरम् । त्वयैव लोकेऽवसिताश्च सेतवो यान् ब्राह्मणाः श्रद्दधते धृतव्रताः ।। ४-६-४४ ।।
sanskrit
My dear lord, Your Lordship has introduced the system of sacrifices through the agency of Dakṣa, and thus one may derive the benefits of religious activities and economic development. Under your regulative principles, the institution of the four varṇās and āśramas is respected. The brāhmaṇas therefore vow to follow this system strictly. ।। 4-6-44 ।।
english translation
हे भगवान्, आपने दक्ष को माध्यम बनाकर यज्ञ-प्रथा चलाई है, जिससे मनुष्य धार्मिक कृत्य तथा आर्थिक विकास का लाभ उठा सकता है। आपके ही नियामक विधानों से चारों वर्णों तथा आश्रमों को सम्मानित किया जाता है। अत: ब्राह्मण इस प्रथा का दृढ़तापूर्वक पालन करने का व्रत लेते हैं। ।। ४-६-४४ ।।
hindi translation
tvameva dharmArthadughAbhipattaye dakSeNa sUtreNa sasarjithAdhvaram | tvayaiva loke'vasitAzca setavo yAn brAhmaNAH zraddadhate dhRtavratAH || 4-6-44 ||
hk transliteration by Sanscript