1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
•
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
आत्मानमर्हयाञ्चक्रे धूपालेपस्रगादिभिः । साध्वलङ्कृतसर्वाङ्गो महिष्यामादधे मनः ।। ४-२६-१२ ।।
: After this, King Purañjana decorated his body with suitable ornaments. He also smeared scented sandalwood pulp over his body and put on flower garlands. In this way he became completely refreshed. After this, he began to search out his Queen. ।। 4-26-12 ।।
english translation
तत्पश्चात् राजा पुरञ्जन ने अपने शरीर में उपयुक्त आभूषण धारण किये। उसने अपने शरीर के ऊपर चन्दन का लेप किया और फूलों की माला पहनी। इस प्रकार वह पूर्णत: तरोताजा (विश्रान्त) हो गया। इसके बाद वह अपनी रानी की खोज करने लगा। ।। ४-२६-१२ ।।
hindi translation
AtmAnamarhayAJcakre dhUpAlepasragAdibhiH | sAdhvalaGkRtasarvAGgo mahiSyAmAdadhe manaH || 4-26-12 ||
hk transliteration by Sanscript