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कस्या मनस्ते भुवि भोगिभोगयोः स्त्रिया न सज्जेद्भुजयोर्महाभुज । योऽनाथवर्गाधिमलं घृणोद्धतस्मितावलोकेन चरत्यपोहितुम् ।। ४-२५-४२ ।।

O mighty-armed, who in this world will not be attracted by your arms, which are just like the bodies of serpents? Actually you relieve the distress of husbandless women like us by your attractive smile and your aggressive mercy. We think that you are traveling on the surface of the earth just to benefit us only. ।। 4-25-42 ।।

english translation

हे महाबाहु, इस संसार में ऐसा कौन है, जो सर्प के शरीर जैसी तुम्हारी भुजाओं से आकृष्ट न हो जाये? वास्तव में तुम अपनी मोहक मुस्कान तथा अपनी छेड़छाड़ युक्त दया से हम जैसी पतिविहीन स्त्रियों के सन्ताप को दूर करते हो। हम सोचती हैं कि तुम केवल हमारे हित के लिए ही पृथ्वी पर विचरण कर रहे हो। ।। ४-२५-४२ ।।

hindi translation

kasyA manaste bhuvi bhogibhogayoH striyA na sajjedbhujayormahAbhuja | yo'nAthavargAdhimalaM ghRNoddhatasmitAvalokena caratyapohitum || 4-25-42 ||

hk transliteration by Sanscript