1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
•
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
25.
पञ्चविंशोऽध्यायः
Chapter 25
26.
षड्विंशोऽध्यायः
Chapter 26
27.
सप्तविंशोऽध्यायः
Chapter 27
28.
अष्टाविंशोऽध्यायः
Chapter 28
29.
एकोनत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 29
30.
त्रिंशोऽध्यायः
Chapter 30
31.
एकत्रिंशोऽध्यायः
Chapter 31
Progress:65.7%
तत्रापि मोक्ष एवार्थ आत्यन्तिकतयेष्यते । त्रैवर्ग्योऽर्थो यतो नित्यं कृतान्तभयसंयुतः ।। ४-२२-३५ ।।
sanskrit
Out of the four principles — namely religion, economic development, sense gratification and liberation — liberation has to be taken very seriously. The other three are subject to destruction by the stringent law of nature — death. ।। 4-22-35 ।।
english translation
चारों पुरुषार्थ अर्थात्—धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष—में से मोक्ष को अत्यन्त गम्भीरतापूर्वक ग्रहण करना चाहिए। अन्य तीन तो प्रकृति के कठोर नियम अर्थात् काल (मृत्यु) द्वारा नाशवान् हैं। ।। ४-२२-३५ ।।
hindi translation
tatrApi mokSa evArtha AtyantikatayeSyate | traivargyo'rtho yato nityaM kRtAntabhayasaMyutaH || 4-22-35 ||
hk transliteration by SanscriptSrimad Bhagavatam
Progress:65.7%
तत्रापि मोक्ष एवार्थ आत्यन्तिकतयेष्यते । त्रैवर्ग्योऽर्थो यतो नित्यं कृतान्तभयसंयुतः ।। ४-२२-३५ ।।
sanskrit
Out of the four principles — namely religion, economic development, sense gratification and liberation — liberation has to be taken very seriously. The other three are subject to destruction by the stringent law of nature — death. ।। 4-22-35 ।।
english translation
चारों पुरुषार्थ अर्थात्—धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष—में से मोक्ष को अत्यन्त गम्भीरतापूर्वक ग्रहण करना चाहिए। अन्य तीन तो प्रकृति के कठोर नियम अर्थात् काल (मृत्यु) द्वारा नाशवान् हैं। ।। ४-२२-३५ ।।
hindi translation
tatrApi mokSa evArtha AtyantikatayeSyate | traivargyo'rtho yato nityaM kRtAntabhayasaMyutaH || 4-22-35 ||
hk transliteration by Sanscript