1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
•
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
हिमालयं पुष्पवहां च तां नदीं निजाश्रमं यत्र ऋषीनपश्यत् । विश्वं विपश्यञ्छ्वसिताच्छिशोर्वै बहिर्निरस्तो न्यपतल्लयाब्धौ ।। १२-९-३० ।।
He saw before him the Himālaya Mountains, the Puṣpabhadrā River, and his own hermitage, where he had had the audience of the sages Nara-Nārāyaṇa. Then, as Mārkaṇḍeya beheld the entire universe, the infant exhaled, expelling the sage from His body and casting him back into the ocean of dissolution. ।। 12-9-30 ।।
english translation
उन्होंने अपने सामने हिमालय पर्वत, पुष्पभद्रा नदी और अपना आश्रम देखा, जहाँ उन्होंने नर-नारायण ऋषियों का दर्शन किया था। फिर, जैसे ही मार्कंडेय ने पूरे ब्रह्मांड को देखा, शिशु ने सांस छोड़ी, ऋषि को उनके शरीर से बाहर निकाला और उन्हें वापस प्रलय के सागर में डाल दिया। ।। १२-९-३० ।।
hindi translation
himAlayaM puSpavahAM ca tAM nadIM nijAzramaM yatra RSInapazyat | vizvaM vipazyaJchvasitAcchizorvai bahirnirasto nyapatallayAbdhau || 12-9-30 ||
hk transliteration by Sanscript