1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
•
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
11.
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
ततोऽभूत्त्रिवृदोङ्कारो योऽव्यक्तप्रभवः स्वराट् । यत्तल्लिङ्गं भगवतो ब्रह्मणः परमात्मनः ।। १२-६-३९ ।।
From that transcendental subtle vibration arose the oṁkāra composed of three sounds. The oṁkāra has unseen potencies and manifests automatically within a purified heart. It is the representation of the Absolute Truth in all three of His phases — the Supreme Personality, the Supreme Soul and the supreme impersonal truth. ।। 12-6-39 ।।
english translation
उस पारलौकिक सूक्ष्म कंपन से तीन ध्वनियों से बना ओंकार उत्पन्न हुआ। ओंकार में अदृश्य शक्तियाँ हैं और यह शुद्ध हृदय में स्वतः ही प्रकट हो जाता है। यह उनके तीनों चरणों - सर्वोच्च व्यक्तित्व, परमात्मा और सर्वोच्च अवैयक्तिक सत्य - में पूर्ण सत्य का प्रतिनिधित्व है। ।। १२-६-३९ ।।
hindi translation
tato'bhUttrivRdoGkAro yo'vyaktaprabhavaH svarAT | yattalliGgaM bhagavato brahmaNaH paramAtmanaH || 12-6-39 ||
hk transliteration by Sanscript