तत्रापि धनवदधनवतोर्धनवति विशेषः त्यागप्रयोजनकर्त्रीः प्रयोजनकर्तीर विशेषः प्रत्यक्ष इत्याचार्याः ॥ १२ ॥
According to the masters of old, between a rich man and one who is not rich, it is the rich man who is interesting, and between one who spends willingly and one who tries to render services, the useful one is often preferable.
english translation
निर्धन से धनवान् और त्यागशील से कार्यसाधक श्रेष्ठ इसमें भी निर्धन की अपेक्षा धनवान् श्रेष्ठ है और त्यागशील की अपेक्षा वेश्या का स्वार्थसाधक श्रेष्ठ है ऐसा कामशास्त्र के पूर्व आचार्यों का मत है॥ १२ ॥
"He who renders services and acts immediately is useful in any enterprise, while the spender will end by going away," says Vatsyayana.
english translation
वेश्या का कार्य सिद्ध करने वाला तो एक बार कार्य सिद्ध करके अपने को कृती मान लेता है, किन्तु त्यागशील तो अतीत में दिये गये धन के विषय में सोचता ही नहीं है-ऐसा आचार्य वात्स्यायन का मत है। है ॥ १३ ॥