तथा स लभते शर्म सर्वपावकपाटवम्। धीवर्णेन्द्रियवैमल्यं वृषतां दैर्घ्यमायुषः ॥३०॥
By the above steps, one gets health, increase of all sorts of digestive powers, intelligence, body complexion, sensory perception, virility and increases life span.
english translation
इस प्रकार का आहार, अभ्यंग, उबटन आदि करने से उस मनुष्य को सुख मिलने लगता है, सर्वपावकपाटव (१. पाचक, २. भ्राजक, ३. रंजक, ४. आलोचक तथा ५. साधक इन सभी ) में कुशलता आ जाती है। बुद्धि, वर्ण, इन्द्रियों की निर्मलता, वृषता ( रतिशक्ति) तथा दीर्घ आयु की प्राप्ति हो जाती है I
तथा स लभते शर्म सर्वपावकपाटवम्। धीवर्णेन्द्रियवैमल्यं वृषतां दैर्घ्यमायुषः ॥३०॥
By the above steps, one gets health, increase of all sorts of digestive powers, intelligence, body complexion, sensory perception, virility and increases life span.
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इस प्रकार का आहार, अभ्यंग, उबटन आदि करने से उस मनुष्य को सुख मिलने लगता है, सर्वपावकपाटव (१. पाचक, २. भ्राजक, ३. रंजक, ४. आलोचक तथा ५. साधक इन सभी ) में कुशलता आ जाती है। बुद्धि, वर्ण, इन्द्रियों की निर्मलता, वृषता ( रतिशक्ति) तथा दीर्घ आयु की प्राप्ति हो जाती है I