1.
प्रथमोऽध्यायः
Chapter 1
2.
द्वितीयोऽध्यायः
Chapter 2
3.
तृतीयोऽध्यायः
Chapter 3
4.
चतुर्थोऽध्यायः
Chapter 4
5.
पञ्चमोऽध्यायः
Chapter 5
6.
षष्ठोऽध्यायः
Chapter 6
7.
सप्तमोऽध्यायः
Chapter 7
8.
अष्टमोऽध्यायः
Chapter 8
9.
नवमोऽध्यायः
Chapter 9
10.
दशमोऽध्यायः
Chapter 10
•
एकादशोऽध्यायः
Chapter 11
12.
द्वादशोऽध्यायः
Chapter 12
13.
त्रयोदशोऽध्यायः
Chapter 13
14.
चतुर्दशोऽध्यायः
Chapter 14
15.
पञ्चदशोऽध्यायः
Chapter 15
16.
षोडशोऽध्यायः
Chapter 16
17.
सप्तदशोऽध्यायः
Chapter 17
18.
अष्टादशोऽध्यायः
Chapter 18
19.
एकोनविंशोऽध्यायः
Chapter 19
20.
विंशोऽध्यायः
Chapter 20
21.
एकविंशोऽध्यायः
Chapter 21
22.
द्वाविंशोऽध्यायः
Chapter 22
23.
त्रयोविंशोऽध्यायः
Chapter 23
24.
चतुर्विंशोऽध्यायः
Chapter 24
Progress:46.3%
तच्छ्रुत्वा भगवान् रामो रुन्धन्नपि धिया शुचः । स्मरंस्तस्या गुणांस्तांस्तान्नाशक्नोद्रोद्धुमीश्वरः ।। ९-११-१६ ।।
After hearing the news of mother Sītā’s entering the earth, the Supreme Personality of Godhead was certainly aggrieved. Although He is the Supreme Personality of Godhead, upon remembering the exalted qualities of mother Sītā, He could not check His grief in transcendental love. ।। 9-11-16 ।।
english translation
सीतादेवी के पृथ्वी में प्रविष्ट होने का समाचार सुनकर भगवान् निश्चित रूप से दुखी हुए। यद्यपि वे भगवान् हैं, किन्तु सीतादेवी के महान् गुणों का स्मरण करके वे दिव्य प्रेमवश अपने शोक को रोक न सके। ।। ९-११-१६ ।।
hindi translation
tacchrutvA bhagavAn rAmo rundhannapi dhiyA zucaH | smaraMstasyA guNAMstAMstAnnAzaknodroddhumIzvaraH || 9-11-16 ||
hk transliteration by Sanscriptस्त्रीपुम्प्रसङ्ग एतादृक् सर्वत्र त्रासमावहः । अपीश्वराणां किमुत ग्राम्यस्य गृहचेतसः ।। ९-११-१७ ।।
The attraction between man and woman, or male and female, always exists everywhere, making everyone always fearful. Such feelings are present even among the controllers like Brahmā and Lord Śiva and is the cause of fear for them, what to speak of others who are attached to household life in this material world. ।। 9-11-17 ।।
english translation
स्त्री तथा पुरुष अथवा नर और मादा के मध्य आकर्षण हर जगह और हर समय पाया जाता है जिससे हर व्यक्ति सदा भयभीत रहता है। यहाँ तक कि ब्रह्मा तथा शिवजी जैसे नियन्ताओं में भी ऐसी भावनाएँ पाई जाती हैं और उनके लिए भी ये भय के कारण हैं। तो फिर उन लोगों के विषय में क्या कहा जाय जो इस भौतिक जगत में गृहस्थ-जीवन के प्रति आसक्त हैं? ।। ९-११-१७ ।।
hindi translation
strIpumprasaGga etAdRk sarvatra trAsamAvahaH | apIzvarANAM kimuta grAmyasya gRhacetasaH || 9-11-17 ||
hk transliteration by Sanscriptतत ऊर्ध्वं ब्रह्मचर्यं धारयन्नजुहोत्प्रभुः । त्रयोदशाब्दसाहस्रमग्निहोत्रमखण्डितम् ।। ९-११-१८ ।।
After mother Sītā entered the earth, Lord Rāmacandra observed complete celibacy and performed an uninterrupted Agnihotra-yajña for thirteen thousand years. ।। 9-11-18 ।।
english translation
सीता द्वारा पृथ्वी में प्रवेश करने के बाद भगवान् रामचन्द्र ने पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन किया और तेरह हजार वर्षों तक वे अनवरत अग्निहोत्र यज्ञ करते रहे। ।। ९-११-१८ ।।
hindi translation
tata UrdhvaM brahmacaryaM dhArayannajuhotprabhuH | trayodazAbdasAhasramagnihotramakhaNDitam || 9-11-18 ||
hk transliteration by Sanscriptस्मरतां हृदि विन्यस्य विद्धं दण्डककण्टकैः । स्वपादपल्लवं राम आत्मज्योतिरगात्ततः ।। ९-११-१९ ।।
After completing the sacrifice, Lord Rāmacandra, whose lotus feet were sometimes pierced by thorns when He lived in Daṇḍakāraṇya, placed those lotus feet in the hearts of those who always think of Him. Then He entered His own abode, the Vaikuṇṭha planet beyond the brahmajyoti. ।। 9-11-19 ।।
english translation
यज्ञ पूरा कर लेने के बाद दण्डकारण्य में रहते हुए भगवान् रामचन्द्र के जिन चरणकमलों में कभी-कभी काँटे चुभ जाते थे उन चरण-कमलों को उन्होंने उन लोगों के हृदयों में रख दिया जो उनका निरन्तर चिन्तन करते हैं। तत्पश्चात् वे ब्रह्मज्योति से परे अपने धाम वैकुण्ठलोक में प्रविष्ट हुए। ।। ९-११-१९ ।।
hindi translation
smaratAM hRdi vinyasya viddhaM daNDakakaNTakaiH | svapAdapallavaM rAma AtmajyotiragAttataH || 9-11-19 ||
hk transliteration by Sanscriptनेदं यशो रघुपतेः सुरयाच्ञयात्तलीलातनोरधिकसाम्यविमुक्तधाम्नः । रक्षोवधो जलधिबन्धनमस्त्रपूगैः किं तस्य शत्रुहनने कपयः सहायाः ।। ९-११-२० ।।
Lord Rāmacandra’s reputation for having killed Rāvaṇa with showers of arrows at the request of the demigods and for having built a bridge over the ocean does not constitute the factual glory of the Supreme Personality of Godhead Lord Rāmacandra, whose spiritual body is always engaged in various pastimes. Lord Rāmacandra has no equal or superior, and therefore He had no need to take help from the monkeys to gain victory over Rāvaṇa. ।। 9-11-20 ।।
english translation
विभिन्न लीलाओं में सदैव संलग्न दिव्य देहधारी भगवान् रामचन्द्र का वास्तविक यश इसमें नहीं है कि उन्होंने देवताओं के आग्रह पर बाणों की वर्षा करके रावण का वध किया और समुद्र पर सेतु का निर्माण किया। न तो कोई भगवान् रामचन्द्र के तुल्य है न उनसे बढक़र; अतएव उन्हें रावण पर विजय प्राप्त करने में वानरों से कोई सहायता लेने की आवश्यकता नहीं थी। ।। ९-११-२० ।।
hindi translation
nedaM yazo raghupateH surayAcJayAttalIlAtanoradhikasAmyavimuktadhAmnaH | rakSovadho jaladhibandhanamastrapUgaiH kiM tasya zatruhanane kapayaH sahAyAH || 9-11-20 ||
hk transliteration by Sanscript