Srimad Bhagavatam

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भूतानामिह संवासः प्रपायामिव सुव्रते । दैवेनैकत्र नीतानामुन्नीतानां स्वकर्मभिः ।। ७-२-२१ ।।

sanskrit

My dear mother, in a restaurant or place for drinking cold water, many travelers are brought together, and after drinking water they continue to their respective destinations. Similarly, living entities join together in a family, and later, as a result of their own actions, they are led apart to their destinations. ।। 7-2-21 ।।

english translation

हे माता, किसी भोजनालय या प्याऊ में अनेक राहगीर पास-पास आते हैं, किन्तु जल पीने के बाद अपने-अपने गन्तव्यों को चले जाते हैं। इसी प्रकार जीव भी किसी परिवार में आकर मिलते हैं किन्तु बाद में अपने-अपने कर्मों के अनुसार वे अपने-अपने गन्तव्यों को चले जाते हैं। ।। ७-२-२१ ।।

hindi translation

bhUtAnAmiha saMvAsaH prapAyAmiva suvrate | daivenaikatra nItAnAmunnItAnAM svakarmabhiH || 7-2-21 ||

hk transliteration by Sanscript