Srimad Bhagavatam

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न हि कश्चित्प्रियः स्त्रीणामञ्जसा स्वाशिषात्मनाम् । पतिं पुत्रं भ्रातरं वा घ्नन्त्यर्थे घातयन्ति च ।। ६-१८-४२ ।।

sanskrit

To satisfy their own interests, women deal with men as if the men were most dear to them, but no one is actually dear to them. Women are supposed to be very saintly, but for their own interests they can kill even their husbands, sons or brothers, or cause them to be killed by others. ।। 6-18-42 ।।

english translation

अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए स्त्रियाँ मनुष्यों के साथ ऐसा व्यवहार करती हैं मानो वे उनकी सर्वाधिक प्रिय हों, किन्तु वास्तव में उनका कोई प्रिय नहीं होता। स्त्रियों को अति साधु स्वभाव का माना जाता है, किन्तु अपने स्वार्थ के लिए वे अपने पति, पुत्र या भाई की भी हत्या कर सकती हैं या दूसरों से करा सकती हैं। ।। ६-१८-४२ ।।

hindi translation

na hi kazcitpriyaH strINAmaJjasA svAziSAtmanAm | patiM putraM bhrAtaraM vA ghnantyarthe ghAtayanti ca || 6-18-42 ||

hk transliteration by Sanscript