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Srimad Bhagavatam

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अङ्गिरा उवाच अहं ते पुत्रकामस्य पुत्रदोऽस्म्यङ्गिरा नृप । एष ब्रह्मसुतः साक्षान्नारदो भगवान् ऋषिः ॥ ६-१५-१७ ॥

Aṅgirā said: My dear King, when you desired to have a son, I approached you. Indeed, I am the same Aṅgirā Ṛṣi who gave you this son. As for this ṛṣi, he is the great sage Nārada, the direct son of Lord Brahmā. ॥ 6-15-17 ॥

english translation

अंगिरा ने कहा—हे राजन्! जब तुमने पुत्र की कामना की थी तो मैं तुम्हारे पास आया था। दरअसल वही अंगिरा ऋषि हूँ जिसने तुम्हें यह पुत्र दिया था। ये जो तुम्हारे पास हैं, भगवान् ब्रह्मा के प्रत्यक्ष पुत्र, महान् ऋषि नारद हैं। ॥ ६-१५-१७ ॥

hindi translation